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रविवार, 4 मई 2014

दागियों को संसद से हटाते क्यों नहीं

सुनील अनुरागी 


दागियों को संसद से हटाते क्यों नहीं 
इरादा क्या है हमें बताते क्यों नहीं ?

कब तक लुटेरे बनकर लूटते रहोगे 
बेशर्मी की हद है लजाते क्यों नहीं ?

मुखौटे पीएम से देश कब तक चलेगा
असली शासक कौन है बताते क्यों नहीं ?

घोटालों का सरदार कहाँ छुपा है 
सामने जनता के उसे लाते क्यों नहीं ?

अब नये मसीहा ने दुनिया को हिला दिया
सर आँखों पर उसे बिठाते क्यों नहीं ?

शनिवार, 10 नवंबर 2012

द्रुत विकास के झूठे नारों से,दुर्गति देश की कर बैठे




द्रुत विकास के झूठे नारों से, दुर्गति देश की कर बैठे .
भ्रष्टाचार की बहती आंधी में, झोला अपना भर बैठे.



केजरी  बहकाए  जनता  को, पर ना  सुधरेंगे  हम कभी,
भ्रष्टाचार विरोधी अन्दोलनों से,भले थोड़ा सा हम डर बैठे.



भ्रष्ट  तंत्र  की ताकत को, दुनिया  देख  रही भारत में,
सच को झूठ बनाकर,राजा,कलमाड़ी को बाहर कर बैठे.



हमारे ठाठ में न रहे कमी,रहना सदा हमारे झांसे में,
डर हमको केवल इतना है,वोटर हमारे मुकर ना बैठे.


जनता के पैसे की लूट मचाने,हम जमें हैं सत्ता में,
हम लुटेरों के वंशज हैं,ये सच अब बयां हम कर बैठे . 

शनिवार, 4 फ़रवरी 2012

राह में यूँ काँटा बिछाया ना करो.

                    राह में यूँ काँटा बिछाया ना करो.
              दूर रहकर मुझे सताया ना करो

              हक़ है  मुझे  करीब  रहने  का,
              महफ़िल में ऐसे पराया ना करो .

              खता क्या है बताओ तो सही,
              बेक़सूर  हूँ फंसाया  ना  करो.

              जिंदगी के लम्हे कीमती हैं बहुत,
               
             दर्देगम   में  इसे जाया  ना  करो .

            खुशियों को दामन में समेत लो सारे,
            आंसुओं  में  इन्हें  बहाया  ना  करो.

मंगलवार, 31 जनवरी 2012

तो मैं क्या करूँ ,

   


                      मुखौटे लगाकर लोग चलने लगे,तो मैं  क्या करूँ ,
               ख्यालात भी उनके बदलने लगे, तो मैं क्या करूँ.

              इश्क की दुनिया रंज-ओ गम की तो न थी मगर,
              अरमां  दिलों  के  टूटने लगे, तो  मैं  क्या  करूँ .

              दौलत  ने  हर चीज  खरीद  डाली है  दुनिया की ,
              इंसानियत भी अब बिकने लगे, तो में क्या करूँ.

              पैमाना दर्देगम का खाली हुआ मगर आजुर्दगी न गयी ,
              छोड़कर  मैखाने  को  वे जाने लगे,तो मैं  क्या  करूँ .

                इरादतन तो 'अनुरागी ' ने उनको बुलाया ही न था ,
               खुद  पहलु  में  वे  आने  लगे  तो  मैं   क्या  करूँ .

मंगलवार, 25 अक्टूबर 2011

गाँव में बेवजह मुनादी पिटवा दी


              
गाँव  में  बेवजह   मुनादी  पिटवादी
बेटा जवान हुआ नहीं शादी करवा दी .

अब  जाम  कहाँ  नसीब  लबों को
मैखाना  जो खुला , आज हटवा दी.

ये जम्हूरियत है या शैतानों की चाल,
गरीबों का पैसा था,अमीरों में बंटवा दी.

न कायदे का डर है,ना हाकिम का खौफ़
सड़क की गाड़ी फुटपाथ पर चलवा दी.

अपने मौज में कमी नहीं नेताओं की,
गरीब के हाथ से रोटी भी छिनवा दी.

ये मुक़दमा कब तलक चलेगा ‘अनुरागी’
फैसला जो आज आना था फिर टलवा दी.              

रविवार, 23 अक्टूबर 2011

लोग रौशनी से नजरें चुराने लगे हैं.

लोग  रौशनी  से नजरें  चुराने लगे हैं-
सच   बोलने   में  कतराने  लगे   हैं - 

मासूमियत झलकती थी जिन आँखों में
अंगारे  वे    अब   बरसाने   लगे  हैं-


मुफ़लिसी में जिनके दिन गुजरे थे कल तक
सियासत पर परचम अपनी लहराने लगे हैं-



मुल्क की तरक्की से जिनको नहीं मतलब 
इलेक्शन में गाल खुद  की  बजाने लगे हैं-

किस  किस   को   हम  'अनुरागी'  कहें

दहशत  हर  घर  में  फैलाने  लगे  हैं-                                   

हम तो लुट गए यार, यारी में .

                       ग़जल

       हम तो लुट गए यार, यारी में .
       मिला बेइंतहाँ   प्यार ,यारी में .

       खुश  हूँ कि अपने  ही   जीते,
       मान ली  हमने  हार,  यारी  में .

       तू जाने का नाम न ले ए दोस्त ,
       रोयेंगे आंसू  हजार, यारी   में.

      न होंगे खफा अब जमाने तक,
       कर ले मुझसे   करार ,यारी में .

   इस तन्हाई  की दवा सिर्फ तू है ,
   लेकर  आजा  बहार,  यारी   में .

      

शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2011

दुनिया के नज़ारे देख हैरान हूँ मैं



दुनिया  के  नज़ारे  देख  हैरान  हूँ  मैं,
कदम  कदम  पर फरेब परेशांन हूँ  मैं.

जायका   बदल   गया  है   हर   खाने   का ,

मिलावटखोरों  के  घर  का  शैतान हूँ  मैं.

गरीब  कैसे पिस रहे  सियासत के खेल मैं , 
कुछ   कह  नहीं  सकता   बेजुबान   हूँ  मैं .

आया  है अस्पताल तो जिन्दगी की दुआ कर ,
हकीम  के  हाथ  में  मौत  का  सामान  हूँ  मैं.

जेब  अगर  खाली है  तो  भाग  यहाँ  से ,

हाकिम   के   दफ्तर   का   फरमान   हूँ  मैं.