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शनिवार, 9 मार्च 2013

बसंत आया


             

डाल-डाल पर,शाख-शाख पर
नव पल्लवित पत्रों में
हरीतिमा लाया ,बसंत आया.
             मिटी उदासी,खिली खुशियाँ
             दूर देश से प्रियतम का,
             संदेशा लाया,बसंत आया.
गई ठिठुरती रातें,बिखरी उमस की सुबह
हर मन के अंतर्मन में
उमंगों की फुहार लाया,बसंत आया.
               आंगन-आंगन में,द्वार-द्वार पर
               सतरंगी इन्द्रधनुषों का
               बहार लाया ,बसंत आया.
कण-कण में ,जीव-जीव पर
नव यौवन का
संचार लाया ,बसंत आया.
                

मंगलवार, 17 जनवरी 2012

अंग-अंग में आग लगी है

   


    मृदुभावों  की  सरिता में
    विकल मन होता प्रभावित-
    मधुमास की मादकता मे
    मेरा  अंतर्मन मर्माहित-
     देख भवरों के मधुपान से
     ह्रदय में अब प्यास जगी है 
               अंग-अंग में आग लगी है-


     तेरे अन्तर्मन की थाह मिले कैसे 
      सागर  की  गहराइयों  से 
     अनमोल  रतन  हैं  उर में तेरे 
      स्नेहलता  है   ऊँचाइयों  में 
      प्रियतम! तुम  कितने निष्ठुर हो \
      विरह  वेदना  खूब  जगी  है- 
                   अंग-अंग में आग लगी है-  


      प्रियतम जब से मैंने तुझको 
      निश्छल  मन  में संजोया है]
       मन मयूर नृत्य करे निसदिन 
      शापित  यौवन  अलसाया   है-
      सावन संध्या की निर्जन वेला में 
       चपल   चांदनी   बनी  सगी है -
                 अंग-अंग में आग लगी है-